Saturday, June 5, 2010

भगवान मंदिर में नहीं गरीबो में बस्ता है.



एँ महलो में रहने वालो अमीरों,
गरीबो पे हँसना छोड़ दो.
कुछ पल के लिए ही सही,
गरीबो   से दिल का नाता छोड़ लो.
एँ महलो में रहने वालो अमीरों,
गरीबो पे हँसना छोड़ दो.२-२-.

भले ही घर हमारे न हो महलो जैसे,
दिल में हमारे दरिया दिली पाई जाती है.
आपनो से आपना पन,गैरो को भी अपनाते  है.
सुखी रोटी ही सही उसको भी बाँट कर खाते है.

हमारे घरो की दीवाले,महलो से कमजोर सही.
हमें रात में नीद आ जाती है.
क्युकी हमारे घर में ना तिजोरी,
 और नी तिजोरी में रक्खी जाने वाली, लक्ष्मी पाई जाती है.

हम हारते नहीं है हिम्मत ,उम्मीद पर जीते है 
आज नहीं तो कल वो पल आयेगा,
जब अमीरों को समझ में आयेगा
भगवान मंदिर में नहीं गरीबो में बस्ता है.



.

मेरे सपनो का भारत तुम बना देना.
एक कमरे में राम,एक कमरे में रहीम,
आंगन में ईशा को बिठा देना.
मेरे सपनो का भारत तुम बना देना.

जंहा न कोई हिन्दू,मुस्लिम,
ईशा का भी भेद मिटा देना.
सभी को इंसान एक दिन तुम बना देना.
मेरे सपनो का भारत तुम बना देना.

पूछे जो भी नाम तेरा आपना काम बता देना.
चले तू भी मुस्कुरा कर चले वो भी मुस्कुरा कर.
सभी को गले से लगा लेना.
मेरे सपनो का भारत बना देना.
मेरे सपनो का भारत बना देना..



हे मात्र भूमि हे भारत माता.
हम सब का कल्याण करो.
दे कर भक्ति हम सबको.
जीवन का उद्धार करो.

जन्म बार बार हो इस भूमि पर,
माँ ऐसा उपकार करो.
हम सब है तेरे बालक,
माँ हम सब पर अनुराग करो.

क्या हिन्दू,क्या मुस्लिम..
क्या सिख क्या इशाई.
हम सब है तेरे बालक,
हम सबको है तू जान से प्यारी.

कसम तुम्हारी हम खाते है,
हम तेरा मान बडायेगे.
शिवराज की इस भूमि में,
मंदिर तेरा बनायेगे.

वीर पुरुषो की तू जननी,
वीरो की तू माता है.
छत्रपाल से लेकर महराना तक,
सब ने तेरे लिए कटा आपना माथा था.

भगत,आजाद,सुभाष,गाँधी,
इन सब   ने भी तुझको पूजा था.
तेरा रक्षा की खातिर माँ इन सब ने,
तेरे चरणों में अपना जीवन सोपा था.

जब जब होगा तुझ पर अत्याचार माँ,
प्रतिकार हमारा होगा.
तेरी रक्षा की खातिर,सिस हमारा अंगे होगा.

हुंकार कोई न अब भर पाएगा.
अधिकार हमारा होगा.
हिन्दू कुश से हिमालय तक,
माँ तेरा ही अंचल होगा.

जब भी आयेगा कोई महमूद,
पृथ्वी  बन कर रोकुगा..
माँ तेरे अंचल को,
आपने खून से सीचुन्गा

देवो की भी है तू माँ,
राम कृष्ण भी यहाँ आये थे  ..
देकर जीवन जीने की सिख,
जीवन के रहष्य बतलाये  थे.

महावीर,बुध ,नानक ने भी,
 जन्म यही पाया था.
तेरी गोदी में खेल कर माँ,
उन्होंने जीवन सच बतलाया था.

कर कृपा माँ चंद्रमणि  पर भी,
जीवन उसका बन जायेगा.
कर के सेवा वो तेरी स्वर्ग सा सुख पायेगा.

है सम्पूर्ण नहीं माँ तेरी यशोगाथा,मेरा  ज्ञान अधुरा है
करता हूँ माँ नित्य तेरी पूजा,तुझमें विश्वाश  पूरा है.
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Sunday, June 28, 2009

Man Ki Udaan


मन बहुत ही चलाये मान होता है इसकी गति लाखो सूर्य किरणों से भी अधिक होती है,यह एक पल में आपना इस्थान बदल कर कही और vichran करने लगता है.जिस भी मनुष्य का मन उसके काबू में है वही इस संसार में महान पुरुष है...

कुछ पंक्ति मेरी लिखी हुई.......


मन मेरा मोहि सताबे
एक पल भी ठहर न पाबे

जो में भजन करू,तन छोड़ मन कही और फिरे |
भगवत भजन में मन कह रश पाबे||
मन मेरा मोहि सताबे

तृष्णा-बंधन खूब सतावे
मन मोर कही चैन न पावे.

माया ग्रसित संसार में यह मन रश पावे |
मेरा मन मोरे पास न अवे-मेरा मन मोरे पास न अवे ||

माँ आज आगन सुना है


माँ आज आगन सुना है

माँ आज आगन सुना है
चहल-पहल के बिना अधुरा है
कल तक यहाँ सब थे,आज क्या हुआ
माँ बोल न ये आगन कैसे सुना हुआ

परिवारों का सिकुड़ता दायरा आज यही पूछ रहा है |
घरो का टूटना आज कल क्यों हो रहा है ||

माँ बोलना कल तक चाचा चची ,दादा दादी सब यही थे |
फिर आज क्या हुआ,सब का आगन अलग कैसे हुआ ||

माँ अब मैं किसके संग खेलुगी,कौन कहानिया सुनाये गा |
मैं तो अभी बच्ची हूँ,कैसे अलग रही पाउगी ||

याद है माँ ये आगन या याद दिलाऊ |
माँ बोल न मैं तुझे कैसे समझाऊ ||

जब तुम और पापा काम पर चले जाते हो |
मैं अकेली यादो में खो जाती हूँ ||

माँ तुम मुझ से सब ले लो .......
बदले में मेरी ख़ुशी मेरा प्यारा आगन दे दो.

मत मरो मुझे इस तरह


मत मरो मुझे इस तरह
आखिर मेरा कसूर क्या है

रुको रुको मत मरो मुझे
मुझे भी दुनिया में आना है आप सब का प्यार पाना है

मैं लड़का नहीं तो क्या हुआ
मैं हे तो वंश बढाउगी
बिन मेरे कुछ न कर पाएगी दुनिया
एक दिन खुद ही मिट जाये गी

जब मैं आउगी खुशिया हजारो लाउगी
घर तेरे दीप जलेगा,मैं कही और उज्जला फैलाउगी

रुको रुको मत मरो मुझे...क्यों दे रहे हो ये सजा.
क्या तुमको मेरी पीडा समझ नहीं आती है

तू तो खुद एक माँ है, तू तो समझ मेरी पीडा
मैं तेरी बिटिया हूँ,तू भी माँ बन जा.

Sunday, April 12, 2009

pyaar dosti pe kurbaan hua.


har baar yahi naam diya maine pyaar ko badnaam kiya.
kyu nahi samjhte ho mere dard ko maine bhi kisi se pyaar kiya.

jane kyu usne mere pyaar ko dosti ka naam diya.
ek pyara sa rista dosti pe kurban hua.

jaane kya dar tha usko jo usne inkaar kiya.
mere pyaar ko pal bhar me je dosti ka naam diya.

dosti ko bhi wo na nifa paye gi.
saath fero ki aag me wo is riste ko bhi jala jaye gi.

ye dokha nahi to kya hoga.
shaadi ke baad wo sab risto ko bhool jaye gi.

Wednesday, January 28, 2009


टुकड़े टुकड़े जोड़ कर ख़ुद को देखने का आईना बनया.
   दुनिया की भीड़ मैं अकेला न हो जाऊ,ख़ुद के लिए दोस्त बनाया.

इसे चाहे कहना मेरा पागलपन पर ये हकीकत है.
इस भीड़ मैं ख़ुद को पहचाने का ये तरीका है.

यहाँ चेहरे लगा के सब घुमते है,छुपा के आपनी हकीकत.
सभ्यता इनकी ओट होती है,मन में इनके खोट होती है.

ख़ुद की परझाई को मैंने आइने मैं कैद कर लिया.
अनजान दुनिया में ख़ुद के लिए दोस्त बना लिया .
देख मेरे हिंद को क्या हुआ,ये इतना कैसे लाचार हुआ.|
बार बार अत्तंक से क्या इसको घाव न हुआ,समझो इसकी पीड़ा.||
ये मूक है कुछ नही बोल पाएगा,हिंद अब आपनी व्यथा नही सुना पाए गा.|||

जाती धर्म सम्प्रदाय भारत के ये भी है लाचारी.|
आतंकवाद सिरहाने बैठा जाने अब किसकी बारी.||

सभ्यता की जहा खोज हुई,आज वही सभ्यता को भूल रहा.|
पछिम की चमक से देखो कही हिंद खो रहा.

Thursday, November 20, 2008

khuda ne kaisa banaya muhabbat tak naseeb na hui.
takdeer bina muhabbat ke takleef bhi na hui.

duniya ki is bheed main kho gaya chand ban kar.
ek adhuri tadp,ek dhura khwab ban kar.

main khud he gayab ho gaya khud ke ahsasso se.
takleef bhi na hui tab sansoo ko.

anshuoo se nahla diya jawaani ko.
wafa ki umeed ab nahi kisi deewani se.

akela ayya tha akela he rah gaya.
is duniya mai main tanha rah gaya.
Tu Na Kar Mera Intjaar,Tum Nahi Chal Payo Gi Mere Saath.
Jindagi Hai Ye Iska Kya Pata,Kal Jaane Kiska Ho Saath.

Hum Tujh se Door Ho Kar Bhi Tere Pass Honge.
Jab Tu Akele Hogi.Dhadkaane Meri Tere Saath Hogi.

Tu Nahi Atii Jab Milne Mujh Se,Milan Ki Pyash Bad jaati Hai.
Tujhe Na dekhu Ek Pal,Ye Shase Ruk Jaati hai.

tera Baat Baat Par BeBaak Hasna Mujhe Bhata Hai.
Par tera Intjaar Karna mujhe Rulata Hai.

Kahna To Tujh Se Bhaut Kuch Hai,Kah Nahi Pata Hun.
Tujh Se milte He Gindagi,Main Tujh Main he Kho Jaata Hun.
Tujh Se milte He Gindagi,Main Tujh Main he Kho Jaata Hun.

आज सहारा बन जयो हमारा,साथ कभी नहीं छोडगे.
दर्द हमको भी मिला है,आप को तनहा नहीं छोडगे.

हम है अकेले सबने साथ हमारा छोडा.
दिल के नाम पर लोगोने ही दिल थोडा.
आखरी सहरा थी मुहब्बत,आज उसने भी साथ छोडा.

तंज कसती है आज ये दुनिया,हंसती भी है ये दुनिया.
हम अकेले क्या हुए हमें भी लुटती है ये दुनिया
.

कफ़न मिला न मुझको,दफ़नाने के लिए.
खुद से पूछता हूँ अब मैं.क्यों किया तुमने ऐसा,बिन कफ़न के दफना दिया.
कल तक था तुमको मुझसे प्यार,आज मुझको ही दफना दिया.
बिन मिटटी के ही तुम ने सुपुर्दे-खाक कर दिया ,ये तुमने क्या किया.
एक पल रुक तो लेती,कही से मैं इंतजाम करलेता.
खुद के लिए कफ़न का कपडा ही खरीद लेता.
मैं अँधा था तब इतना सिर्फ तू दिखती थी.
मरने से मेरी रूह चीखती थी.
पर वो दिन भी आया मेरे प्यार से तेरा मन भर आया.
तू ने बिन कफ़न के मुझे दफनाया.

Thursday, October 16, 2008

ऐ मेरी झूठी मुहब्बत,मैं तुझे झूठा प्यार करू


ऐ मेरी झूठी मुहब्बत,मैं तुझे झूठा प्यार करू.
तेरे लिए मैं झूठ का ताजमहल खडा करू.

उस महल में मैं तुझे चुनवा दू,कुछ सोच के रह जाता हूँ.
रात को कही तू आ न जाये ये सोच कर दर जाता हूँ.

तेरी खूबसूरती को सूरज की आग लगे.
ये मेरी झूठी मुहब्बत तुझे मेरी बात लगे.

शर्मो-हया की देवी कभी तो शर्माजा.
५ बछो की अम्मा हो गई अब तो अकाल(BUDHI) आ जा.

झूठी खूबसूरती के लिबाज़ ,मैं तू शैतान लगती है.
रात मैं खून पीने वालो मच्छरों को तू संतान लगती है.

खून मैं तेरे पानी मिल जाये तेरे लम्बे दातो मैं सडन पड़ जाये.
जिन्हें देख कर तेरा कलेजा ठंडा होता था.
उनको तेरी बुरी नज़र लग जाये.


रात को जब तू निकलती अहि लोगो की सांसे रुक जाती है.
जिस गली से तू निकल जाये वहा,के कुत्ते मर जाये.


तेरे दर से अब लोगो ने घर से निकलना छोड़ दिया.
घर मैं ही उन्हों ने तेरा सैतानी चेहरा लगा लिया. 
घर मैं ही उन्हों ने तेरा शैतानी चेहरा लगा लिया.

माँ का दर्जा क्यों पाया?

माँ का दर्जा क्यों पाया?

जिस स्त्री ने दूध पिलाया,उसने हे माँ का दर्जा क्यों पाया.
जिस लड़की ने बंधी राखी,उसने हे बहन का दर्जा क्यों पाया.
लगता है हमारा समाज सो गया है तभी रिस्तो मैं इतना वेध आ गया है.
तभी रिस्तो मैं इतना वेध आ गया है.

संबंधो का यह लोप नहीं तो और क्या है?
मन की यह सोच नहीं तो और क्या है?
मन की बिषय पीडा साफ झलक आती है.
जब रह चलती लड़की बाज़ार मैं लुट जाती है
.
जब रह चलती लड़की बाज़ार मैं लुट जाती है.

पत्नी के आते ही गहर स्वर्ग बन जाता है.

पत्नी के आते ही गहर स्वर्ग बन जाता है.

पत्नी के आते ही गहर स्वर्ग बन जाता है.
देवी मूरत की जगह पत्नी का चेहरा नज़र अत्ता है.

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मेरी पत्नी के आत्ते मैं भी बदल गया.
अब मुझे कुछ समझ मैं नहीं अत्ता है.
पत्नी किस-किस से बाते करती है.
यही सोचते सोचते समय निकल जाता है.

अब तो पत्नी जी का जंजाल बन गई .
घर में ही मेरे ससुराल बन गई.
घर में ही मेरे ससुराल बन गई.


अब सास-ससुर सब यही पाए जाते है.
मोहल्ले वाले मुझे ताने सुनाये जाते है.

आपने ही घर में हो गया हूँ मैं बंदी.
ऐसा लगता है जैसे हो गई मेरी नशबंदी.

सारा दिन मुझ पर हुक्म चलाया जाता है.
बात बात पर मेरा मज्ज़क उड़ाया जाता है.

महीनो बीत जाते है पत्नी से नहीं मिल पता हूँ.
सास-ससुर के अंगे मैं बेबश नज़र आता हू.
सास-ससुर के अंगे मैं बेबश नज़र आता हू.

मेरी दशा अब किसी से छुपी नहीं है.
मेरे ही घर मैं मेरे लिए जगह नहीं है.

मोहल्ले वाले भी अब मुझ पर तरश खाते है.
भाई राम तुम्हारे अछे दिन आने वाले है.
सुबह-शाम यही सुनते है.
सुबह-शाम यही सुनते है.

नारी समाज की आधारशिला नारी नहीं पाषणशिला

नारी समाज की आधारशिला नारी नहीं पाषणशिला.

नारी समाज की आधारशिला नारी नहीं पाषणशिला.
नारी से समाज चला नारी से ही हमको सम्मान मिला.
नारी मातृत्व का वोध कराती है,जननी ये सुख लती है.

झमा त्याग की ये देवी,कलयुग मैं कामनी नज़र आती है.
कम पीडा से ग्रसित मनुष्य को अति मन भाती है.
बाजारों मैं ये बेचीं जाती है.

करुना मय इनका स्वरुप .अरुणामय इनका स्वरुप,.......
बाजारों मैं लुटता है,इंसान आपने ही मूल्यों पर गीरता है.
नारी की इस व्यथा को व्यवस्था बना दिया गया.
आपनी सुख पूर्ति के लिए इनको समाज मैं गीरा दिया गया.


मान सम्मान सब खो गया,इनका जीवन अन्धकार मैं खो गया.
अगर हमने आपनी इस अवस्था को नहीं बदला,तो समाज खत्म हो जायेगा.
फिर से नारी का सम्मान लौट के नहीं आयेगा.

Saturday, October 11, 2008

क्या ये है सही.

रत्न जड़ित श्रंगार सही,ज्ञान सही बैराग्य सहित।
लोक सही परलोक सहित,सब जन सही सब सहित।
द्वेष सही प्रेम सहित,पाप सही पुण्य सहित।
धर्मं सही देश सहित,अडम्बर सही पाखंड सहित।
अयोध्या सही राम सहित,अजमेर सही दरगाह सहित।
पीर सही पैगम्बर सहित,ईशा सही ईश सहित।
राम सही अनुराग सहित,ज्ञान सही अज्ञान सहित।
सब सही सब सहित,ये है सब सही सब सहित।
कृष्ण सही ब्रज सहित,गुरु सही गुरुवाणी सहित।
धर्मं सही अधर्म सहित,सब सही सब सहित।
दिन सही रात सहित,प्रकाश सही सूर्य सहित।
अंत सही प्रारम्भ सहित,नाश सही विनाश सहित।
सब सही अंत सहित,म्रत्यु सही जीवन सहित।
सब सही यहाँ सब सहित,फिर भी देश बाटे क्या ये है सही।
क्या ये है सही.